ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन में जनसंचार माध्यमों की भूमिका (जनपद अम्बेडकर नगर के जहाँगीरगंज, रामनगर, बसखारी विकास खण्ड के संदर्भ में)

 

सोनम चैरसिया1, डाॅ. दीप्ति सुनेजा2

1शोध छात्रा, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गल्र्स पी.जी. काॅलेज, कानपुर (.प्र.)

2एसोसिएट प्रोफेसर, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गल्र्स पी.जी. काॅलेज, कानपुर (.प्र.)

*Corresponding Author E-mail:  sonamchaurasia404@gmail.com

 

ABSTRACT:

समकालीन विश्व में संचार के जन माध्यमों की भूमिकाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। यह समाजीकरण का एक सशक्त माध्यम बन गया है। सामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रणात्मक दृष्टि रखना संचार माध्यमों की अन्य महत्वपूर्ण भूमिका है। यह केवल परम्परा का वहन ही नहीं करता बल्कि यह सामाजिक आलोचना को भी स्वर देता है और इस रूप में सामाजिक नियंत्रण का साधन बनता है। जनसंचार माध्यम राष्ट्रीय विकास में तीन तरह से सहायक होते हैं। जनता को राष्ट्रीय विकास की सूचना देना, विकास प्रक्रिया में सहभागी बनाना, विकास के लिए आवश्यक तकनीकी दक्षता प्रदान करना। प्रस्तुत शोध पत्र में ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन में जनसंचार माध्यमों की भूमिका का सूक्ष्म अध्ययन किया गया है। संचार साधनों के कारण ग्रामीण निवास्य में विकास के विविध पक्षों यथा-कृषि तत्सम्बन्धी कार्यों, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक धार्मिक इत्यादि पक्षों में होने वाले परिवर्तनों का गुणात्मक एवं मात्रात्मक अध्ययन यथेष्ट रूप में करने का प्रयास किया गया है। अध्ययन क्षेत्र अम्बेदकर नगर की 88.29 जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जो तकनीकी दृष्टि से पिछड़े हैं एवं उनमें नवाचार को अपनानें की दर और तीव्रता कम है। शोध पत्र का उद्देश्य लोगों में जनसंचार और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित करना है जिससे क्षेत्र का समन्वित ग्रामीण विकास संभव हो सके। जिसके लिए प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्रोत से प्राप्त आँकड़े का प्रयोग किया गया है। शोध समस्या संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रश्नावली तथा साक्षात्कार, अनुसूची का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र व्याख्यात्मक विश्लेषणात्मक अनुसंधान पर आधारित है।

 

KEYWORDS: ग्रामीण, सामाजिक परिवर्तन, जनसंचार, नवाचार, समावेशी, विकास।

 


 

 

INTRODUCTION:

परिवर्तन प्रकृति का एक शाश्वत एवं अटल नियम है। मानव समाज भी उसी प्रकृति का अंग होने के कारण परिवर्तनशील है (ब्ींदकंदंए त्ण्ब्ण् 1980) समाज की इस परिवर्तनशील प्रकृति को स्वीकार करते हुए मैकाइवर ने लिखा है कि- ‘‘समाज परिवर्तनशील एवं गत्यात्मक है।’’ ग्रीक विद्वान हेरेक्लिटिश ने भी कहा था, ‘‘सभी वस्तुएँ परिवर्तन के बहाव मे है।’’ सामान्यतः सामाजिक परिवर्तन का तात्पर्य समाज में घटित होने वाले परिवर्तनों से है (च्ंजींाए ज्ञण्च्ण् 1989) प्रारंभ में समाज वैज्ञानिकों ने उद्विकास, प्रगति एवं सामाजिक परिवर्तनों में कोई भेद नहीं किया था। वे इन तीनों अवधारणाओं का प्रयोग एक ही अर्थ में करते थे। शैक्षिक प्रगति के कारण विद्वानों ने इसके अर्थों में व्यापक विभेद किया है। कुछ विद्वानों ने सामाजिक ढाँचे में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा है, तो कुछ विद्वानों ने सामाजिक संबंधों के परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा है। संपूर्ण समाज या उसके किसी पक्ष में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहते हैं (स्नेेपंदए च्पमए 1972) सामाजिक परिवर्तन जीवन की स्वीकृति रीतियों में परिवर्तन को कहते हैं, ये परिवर्तन भौगोलिक दशाओं के परिवर्तन से हुए हो अथवा सांस्कृतिक साधनों, जनसंख्या की रचना अथवा विचारधाराओं के परिवर्तनों से हुए हों या समूह के अंदर हुए आविष्कारों या प्रसार से हुए हों। सामाजिक परिवर्तन दशाएँ हैं, जो मानवीय सम्बन्धों, व्यवहारों, संस्थाओं, प्रथाओं, परिस्थितियों, सामाजिक संरचना, प्रकार्य मूल्यों एवं कार्य प्रणालियों में होते हैं। संचार मनुष्य की मूलभूत जरूरत है (सिंह, अरूण कुमार, 2017) आदिकालीन लोगों द्वारा चित्र बनाकर अपनी बात सम्प्रेषित करने की शुरूआती तकनीक आज इण्टरनेट तक पहुँच गयी है। संचार एक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति या समूह अपनी भावना एवं संवेग अन्य व्यक्ति या समूह तक ऐसी सक्षमता से पहुचाएँ, ताकि वे उसे समझकर ग्रहण कर अपनी प्रतिक्रिया का बोध दिला सके (चैरसिया, महीप, 2018) जनसंचार का अर्थ-जन समुदाय तक मुद्रित सामग्री, इलेक्ट्रानिक और लोकसंस्कृति जैसे विभिन्न प्रकार के जन माध्यमों से विचारों, जानकारी, अनुभवों और मनोरंजन को लोगों तक पहुँचाना। जनसंचार, संचार का वह रूप है जो एक साथ अनगिनत लोगों के लिए हो। जनंसचार में किसी किसी माध्यम या साधन की आवश्यकता होती है (अग्रवाल, जी.सी. 2017-18) संचार से जनसंचार तक की यात्रा पारस्परिक सम्पर्क और समस्याओं के समाधान का साधन तो है ही, विश्व स्तर पर दूरियाँ समाप्त करने और सरकार तथा आम जनता के मध्य विकास के स्रोतों की सहज और समयबद्ध उपलब्धता कराने में भी सहयोगी रहते हैं।

जनसंचार माध्यमों का वर्गीकरण-

 

अध्ययन क्षेत्र

अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जनपद है, जिसका जिला मुख्यालय अकबरपुर है। जिसका कुल क्षेत्रफल 2,520 वर्ग कि.मी. है। 2011 की जनगणना के अनुसार अम्बेडकर नगर की कुल साक्षरता 76.86 है जिसमें से पुरुष साक्षरता 82.53 तथा महिला साक्षरता 70.84 है। क्षेत्र की 88.29 जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जिनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि और उससे संबंधित उद्योग है जिले में लिंगानुपात 976 है जोकि भारत में 1000 पुरूषों पर 940 महिलाओं की तुलना में अधिक है। अम्बेडकर नगर में कुल 9 विकास खण्ड हैं, जिनमें से तीन विकास खण्डों क्रमशः जहाँगीरगंज, रामनगर बसखारी को शोध अध्ययन हेतु चयन किया गया है।

 

चित्र-1

शोध अध्ययन का उद्देश्य

1.     जनसंचार के माध्यमों एवं उसके प्रयोग के प्रति ग्रामीण समाज में रहने वालों की सामान्य अभिवृत्ति का अध्ययन।

2.     ग्रामीण समाज के लोगों की विभिन्न मूलभूत समस्याओं के प्रति जागरूकता एवं परिवर्तन को ज्ञात करना।

3.     जनसंचार के माध्यमों के कारण ग्रामीण सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिवर्तनों का विश्लेषण करना।

 

आंकड़ा स्रोत एवं विधितंत्र

प्रस्तुत शोध पत्र में प्राथमिक तथा द्वितीयक एवं तृतीयक स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। सामाजिक, आर्थिक परिवर्तनों को ज्ञात करने के लिए प्रश्नावली तथा साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए यथा स्थान पर तालिका का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र अम्बेडकर नगर जनपद के तीन विकास खण्डों जहाँगीरगंज, रामनगर, बसखारी के 300 (प्रत्येक से 100) उत्तरदाताओं से प्राप्त अभिमत को तालिका में दिखाया गया है। यह शोध पत्र व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक अनुसंधान पर आधारित है।

 

परिणाम एवं परिचर्चा:

प्रस्तुत शोध पत्र के प्रारंभ में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों पर जनसंचार माध्यमों के प्रभावों को सर्वेक्षित करने का प्रयास किया गया है। जिसके लिए शोध अध्ययन क्षेत्र के तीन विकास खण्डों-(1) जहाँगीरगंज (2) रामनगर (3) बसखारी से प्राप्त सूचनाओं का गहन एवं सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया है तथा यह जाननें का प्रयास किया गया है कि क्या विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में संचार माध्यमों की भूमिका है? उत्तरदाताओं से प्राप्त अभिमत को निम्नलिखित विभिन्न सारणियों में दर्शाया गया है।

 

तालिका-1 (ग्रामीण विकास में जनसंचार माध्यमों की आश्यकता

 

तालिका-1 में वर्णित प्राथमिक आँकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि सर्वेक्षित क्षेत्र के कुल 300 उत्तरदाताओं में से 85.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ग्रामीण विकास हेतु संचार साधनों की आवश्यकता को स्वीकार किया है। तालिका के विश्लेषण से स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है कि ‘‘ग्रामीण विकास में जनसंचार माध्यमों की आवश्यकता है।’’ ऐसा इसलिए है कि, जनसंचार माध्यमों से विकास के कार्यक्रमों की पूर्ण जानकारी हो सकती है साथ ही उत्तरदाताओं ने यह भी स्वीकार किया है कि जहाँ संचार के साधनों की उपलब्धता है वहाँ ग्रामीण विकास की दर तीव्र और जहाँ संचार के साधनों का अभाव है अथवा कम हैं वहाँ पर विकास दर अपेक्षाकृत कम है।

 

ग्रामीण जीवन के विविध पक्ष एवं जनसंचार माध्यम

सामाजिक पक्ष

आधुनिक संचार माध्यम ग्रामीण जीवन शैली को बहुत प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में परम्परागत रहन-सहन एवं आचार-विचार में क्रांतिकारी परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। इस प्रकार संचार माध्यमों की भूमिका व्यक्ति के विकास एवं सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। यह कहना अतिशयोक्ति होगा कि ‘‘विकास के लिए संचार एक निवेश है।’’ लेकिन वहीं पर टेलीविजन और मोबाइल, इंटरनेट का प्रसार निरंतर दिनों-दिन बढ़ रहा है, परन्तु उसका स्तर दिन--दिन गिर रहा है। ज्यादातर व्यक्ति टेलीविजन और मोबाइल, इंटरनेट की चपेट में हैं वो घरों में कैद होकर रह गये हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि व्यक्तिगत रूप से अन्तःक्रिया कम हुयी है। जिससे हम की भावना में कमी रही है।

 

तालिका-2 (जनसंचार माध्यमों का सामाजिक पक्ष पर प्रभाव)

 

आर्थिक पक्ष

भारत में राष्ट्रीय विकास की अवधारणा वस्तुतः भारत के ग्रामीण विकास में सन्निहित है। यदि कहा जाए कि आर्थिक विकास की धुरी, कृषि का विकास है और कृषि के विकास में ही आर्थिक विकास छिपा हुआ है, तो अतिशयोक्ति होगी। कृषि की दशा के सुधार हेतु संचार-साधनों का सम्यक् प्रयोग करके तकनीकी प्रौद्योगिकी ज्ञान एवं सूचनाओं से ग्रामीण/कृषकों को अवगत कराया जा सकता है तथा शासकीय अशासकीय सहायता से भी लाभान्वित किया जा सकता है। अध्ययन क्षेत्र अम्बेडकरनगर में सहज जन सेवा केन्द्र, इण्टरनेट, मोबाइल आदि से कृषकों की दशा में सुधार रहा है।

 

तालिका-3 (जनसंचार माध्यमों का आर्थिक पक्ष पर प्रभाव)

 

राजनैतिक पक्ष

संचार माध्यमों ने अपनी उपयोगिता के रूप में राजनीतिक गतिविधियों के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। इससे राजनीतिक जागरूकता को बढ़ावा मिलता है और लोगों में राजनीतिक गतिविधियों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि होती है। चुनाव के पूर्व होने वाले जनमत संग्रह राजनैतिक संचार के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है। संचार माध्यमों से आम जनता की आवश्यकताओं उनकी इच्छाओं एवं उनकी सोच प्रकट होती है। इन सबसे राजनीतिज्ञों को अपनें कार्यकलापों के बारे में फीडबैक मिलता है। संचार माध्यमों के प्रसार से अध्ययन क्षेत्र में राजनीतिक शिक्षा का प्रसार हुआ है।

 

तालिका-4 (राजनीतिक पक्ष एवं जनसंचार माध्यम

 

शैक्षिक पक्ष

जब रेडियो, टेलीविजन का आविष्कार हुआ तो संचार माध्यमों में नई क्रांति आयी। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन ने शहरी क्षेत्रों के अतिरिक्त सुदूर बीहड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी लोकप्रियता कायम की। आम आदमी की मानसिकता बदलने में वह़ काफी हद तक सफल रहा। पढ़नें-लिखनें और सीखनें के अतिरिक्त व्यक्ति के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले आयामों में भी इलेक्ट्रानिक मीडिया ने प्रभावित किया। कोरोना काल में इंटरनेट और संचार के साधनों का विकास ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। विकास खण्ड जहाँगीरगंज, रामनगर, बसखारी में सर्वेक्षण और साक्षात्कार से ज्ञात हुआ है कि क्षेत्र के छात्र-छात्राओं में शैक्षिक अभिरूचि में अभिवृद्धि हुयी है।

 

धार्मिक पक्ष

जन संचार के विविध साधन आज के युग में राष्ट्रधर्म के विकास के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के आदर्श को प्रस्तुत कर रहे हैं। विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा शांति और सद्भावना, भाई-चारे का संदेश प्रेषित करने में सहायक होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रूढ़िवादिता और अंधविश्वास में तेजी से कमी रही है। संचार माध्यमों के कारण अध्ययन क्षेत्र में रूढ़िवादी एवं अप्रासंगिक तथ्यों से निजात पाने की प्रवृत्ति का संचार हो रहा है। क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और तर्क वितर्क करने की प्रक्रिया का विकास हुआ है।

 

अपराध एवं जनसंचार

संचार माध्यम समाज का दर्पण है। समाज में पल-पल घट रही घटनाओं का विश्लेषण आम लोगांे तक पहुँचाने का कार्य करता है। ये समाज में जहाँ अनेक प्रकार की गतिविधियों का निवारण तथा ज्ञानपरक तथ्य प्रस्तुत करते हैं वहीं इससे सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि होती है। वहीं दूसरी ओर समाज में घट रही विसंगतियों एवं आपराधिक घटनाओं का प्रस्तुतीकरण भी इसी गति से हो रहा है। इन्हीं के फलस्वरूप जहाँ समाज में अनेकानेक सकारात्मक पहलुओं का प्रभाव रहता है वहीं नकारात्मक रूप में भी संचार माध्यम समाज पर प्रभाव डालते हैं। जैसे-जैसे इण्टरनेट पर निर्भरता बढ़ रही है, नये तरह के अपराधों को अंजाम देने का रास्ता खुल गया है। संचार माध्यमों से लोकसंस्कृति और परमंपराओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

 

खान-पान में जागरूकता एवं जनसंचार

संचार माध्यमों के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से और खान-पान के संबंध में विभिन्न विज्ञापन और जागरुकता कार्यक्रमों के कारण अध्ययन क्षेत्र में पोषण के संबंध में सजगता का संचार हुआ है। जिसका प्रभाव ग्रामीणों के खान-पान की दिनचार्य पर पड़ रहा है। स्वच्छता संबंधी संदेश लोगों तक आसानी से पहुँच रहा है, जिससे क्षेत्र में बिमारियों में कमी आयी है और लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है।

 

ग्रामीणों का शहरों की तरफ पलायन एवं जनसंचारः-

जनसंचार माध्यमों द्वारा ग्रामीणों की विभिन्न शासकीय योजनाओं जैसे-मनरेगा, एस.जी.एस.वाई आदि के प्रति जागरुक होने पर इन कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ी है जिसके परिणाम स्वरूप ग्रामीणों का शहरों की तरफ पलायन में कमी आयी है। सहज जन सेवा केन्द्र, आॅनलाइन शिक्षा के प्लेटफार्मों ने क्षेत्र की युवा पीढ़ी को गाँव में ही रोजगार का सृजन किया है।

 

निष्कर्ष

जनसंचार माध्यमों ने लोगों के दृष्टिकोण में परिवर्तन लाया है। अब लोग जानने लगे हैं कि जिस समूह में उन लोगों का पालन-पोषण हुआ है, उस समूह में जीने का रास्ता ही, एकमात्र रास्ता नहीं है। बल्कि जीवन जीने के अनेक रास्ते हैं। जनसंचार में हुए क्रांतिकारी परिवर्तन, राष्ट्र के अंदर विभिन्न समूहों में बँटे हुए समाज को, एक सामाजिक संगठन के मूल्य एवं आदर्श एक समान रूप में विकसित हो रहे हैं। इस तरह यह एक तरफ तो राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरी तरफ, सामाजिक परिवर्तन में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा हैं। गाँव के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए गृह निर्माण, स्वास्थ्य, कृषि, रहन-सहन, विकास योजनायें, उद्योग में आधुनिक तकनीक का अनुकूलन आवश्यक है। जनसंचार माध्यम द्वारा गाँवों में आधुनिक तकनीक को उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। और आज इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होने लगा है। प्रारंभ में रूढ़िवादी दृष्टिकोण के कारण अध्ययन क्षेत्र में नवाचार को अपनाने की दर कम थी लेकिन जागरूकता कार्यक्रमों के कारण अब अम्बेडकर नगर जनपद के जहाँगीरगंज, रामनगर, बसखारी विकास खण्ड में शोध सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि इनकी अभिरूचि में वृद्धि हुयी है। संचार माध्यम क्षेत्र के लिए अभिशाप होकर वरदान सिद्ध हो रहा है। जो ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन का मुख्य कारण बन रहा है। इस तरह यह परिवर्तन बहुत सारे पुराने स्वभाव, विचार, विश्वास, विचारधारा एवं मूल्यों के रूपांतरण से जुड़ा हुआ है साथ ही कुछ नये विचारधाराओं एवं मूल्यों को विकसित करता है, जो आधुनिक समय में जीने के लिए आवश्यक है।  

 

संदर्भ सूची

1.      Chandana, R.C. and Sidhu, M.S., 1980, Introduction to Population Geography, Kalyany Publication, New Delhi, p. 59-62.

2.      District Census Handbook Ambedkar Nagar (2018)

3.      India (2001) Mass Communication, Publication Division, Ministry of Information and Broad Casting Govt. of India. Patiala House, New Delhi.

4.      Lussian, Pie: Communication and Development, Edited, Newe Jerssey University Press, New Jerssey; 1972, p. 4

5.      Pathak, K.P.: Role of I.R.D.P. in the Rural Development of U.P.: A case study of five villages of Firozabad District-Published thesis-Research Publications Rajasthan, Jaipur, 1989, p. 7.

6.      World Bank collection of development indicators (2020).

7.        अग्रवाल, जी.सी., कुलश्रेष्ठ एस.पी. (2017-18), शैक्षिक तकनीकी एवं सूचना सम्प्रेषण तकनीकी’’, अग्रवाल प्रकाशन, पेज नं0 103-114.

8.        चैरसिया, महीप, 2018, सामाजिक-आर्थिक, रूपांतरण एवं ग्रामीण विकास: जौनपुर जनपद का एक भौगोलिक अध्ययन’’, स्वीकृत शोध प्रस्ताव, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर।

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10.      सिंह, अरूण कुमार (2017) मनोविज्ञान, समाजशास्त्र तथा शिक्षा में शोध विधियाँ’’, मोतीलाल बनारसीदास, पेज नं. 19-80

 

 

 

 

 

 

Received on 10.01.2021         Modified on 14.02.2021

Accepted on 19.03.2021         © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences. 2021; 9(1):22-26.